पहली बार जब उससे बात हुयी ....

 उस एक दिन जब बातें शुरू हुई तुमसे लगा कुछ तो अलग सा है तुम में लगा कुछ तो नया सा है तुम में फिर रोज़ की बातें होती गयी और यूं बिना सोचे पिघलती रही मैं उन में यूं ही बिना समझे फिसलती रही उस रास्ते पे हाँ पता था मुझको दोबारा उसी रास्ते जा रही हूँ जहाँ गम बहुत हैं पर गम की क्या बिसात यहाँ तुम्हारा साथ बहुत है उस दिन जब पहली मुलाकात हुई तुमसे लगा जैसे मैं खुद को मिल गयी मेरे अंदर की मुरझाई कली खिल गयी फिर तुम्हारा  मुझको गले लगा कर कसम से मेरे अंदर कुछ तो कमाल कर गया बहुत दिनों से शांत मेरे मन में सवाल कर गया फिर मिलना हुआ और मिलते रहना हुआ तुम्हारी बातें तुम्हारी आँखों से पढ़ना हुआ तुझको ढूंढ कर तुझमें ही खोना हुआ सच, ये एक प्यार सिर्फ तुमसे कई हज़ार बार हुआ फिर हुआ कुछ बुरा शायद उपरवाले की मर्ज़ी थी तेरा मुझसे कई दफे रूठ जाना हुआ मेरा तुझको हर दफे मनाना हुआ और हर आंसू के बाद भी दुआ में उठे हाथ और झुकी नज़रों में तेरी खैरियत का आना हुआ और मेरी ज़िन्दगी से तेरा जाना हुआ ....

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